राहुल गांधी 21 जनवरी को कुरुक्षेत्र में कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रशिक्षण शिविर को संबोधित करेंगे
- By Gaurav --
- Monday, 19 Jan, 2026
Rahul Gandhi to address Congress district presidents training camp in
राहुल गांधी का 21 जनवरी को कुरुक्षेत्र पहुँचना केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि कांग्रेस के उस प्रयास का संकेत है जिसमें वह संगठनात्मक मजबूती को अपनी राजनीति के केंद्र में लाना चाहती है। हरियाणा और उत्तराखंड के जिला इकाई अध्यक्षों के लिए आयोजित यह प्रशिक्षण शिविर ऐसे समय में हो रहा है, जब विपक्षी राजनीति को नए सिरे से आत्ममंथन की ज़रूरत है।
कुरुक्षेत्र में 13 से 22 जनवरी तक चल रहे इस शिविर में हरियाणा के 33 और उत्तराखंड के 27 जिला अध्यक्षों की भागीदारी यह बताती है कि कांग्रेस अब केवल चुनावी नारों के बजाय कैडर-आधारित राजनीति को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रही है। संगठन का जिला स्तर मजबूत होगा, तभी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कोई वैकल्पिक राजनीतिक विमर्श प्रभावी हो सकता है।
मुद्दों की राजनीति बनाम वादों की राजनीति
इस अवसर पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा उठाए गए सवाल यह दिखाते हैं कि कांग्रेस अपनी रणनीति को जनजीवन से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित करना चाहती है। किसानों की आय दोगुनी करने के वादे, महिलाओं को 2100 रुपये देने की घोषणा और मनरेगा जैसे अधिकार आधारित कानून—ये सभी ऐसे विषय हैं, जिनका सीधा संबंध आम आदमी के रोज़मर्रा के संघर्ष से है।
किसानों की लागत में बढ़ोतरी और आय में ठहराव का सवाल केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि कृषि अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति का प्रतिबिंब है। इसी तरह महिलाओं के लिए घोषित योजनाओं का सीमित दायरा, सरकार और समाज के बीच भरोसे की खाई को और गहरा करता है।
मनरेगा और अधिकारों की बहस
मनरेगा को लेकर उठी चिंता केवल रोजगार तक सीमित नहीं है। यह दलितों, पिछड़े वर्गों, ग्रामीणों और पंचायतों के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है। अगर लाखों पंजीकृत कामगारों के बावजूद कुछ हजार परिवारों को ही पूरा काम मिल पा रहा है, तो यह नीति और क्रियान्वयन—दोनों पर सवाल खड़े करता है।
आगे की राह
राहुल गांधी का यह प्रशिक्षण शिविर बताता है कि कांग्रेस नीतिगत बहस और संगठनात्मक अनुशासन को साथ लेकर चलना चाहती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह पहल केवल प्रशिक्षण शिविर तक सीमित रहेगी या फिर यह ज़मीनी स्तर पर ठोस राजनीतिक संघर्ष में बदलेगी?
कुरुक्षेत्र का यह आयोजन कांग्रेस के लिए एक अवसर है—
संगठन को मजबूत करने का, मुद्दों को धार देने का और जनता के सवालों को राजनीति के केंद्र में लाने का।
अगर यह प्रयास केवल भाषणों तक सीमित न रहकर जमीनी कार्रवाई में बदलता है, तभी यह प्रशिक्षण शिविर भविष्य की राजनीति में अपना वास्तविक असर छोड़ पाएगा।